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Magh Mela Prayagraj:- माघ मेला प्रयागराज स्नान तिथियाँ, कैसे जाएँ, कहाँ रुकें

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By wiralwala

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Magh Mela Prayagraj:- प्रयागराज को तीर्थों का राजा कहा जाता है, और इसकी सबसे बड़ी वजह है त्रिवेणी संगम, गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती का पावन संगम. माघ मेले के दिनों में यही संगम आस्था, स्नान, दर्शन और साधु-संतों की परंपरा का केंद्र बन जाता है. माघ मेला 2026 इसलिए भी खास है क्योंकि महाकुंभ 2025 के बाद यह पहला माघ मेला है, और इसे प्रशासन मिनी कुंभ के स्वरूप में आयोजित कर रहा है. इस बार व्यवस्थाएँ अलग बताई जा रही हैं, इसी कारण कई लोग इसे महामाघ मेला भी कह रहे हैं. अनुमान है कि इस बार 12 से 15 करोड़ श्रद्धालु प्रयागराज पहुँच सकते हैं.

Magh Mela Prayagraj 2026 क्यों खास माना जा रहा है?

माघ मेला हर साल होता है, लेकिन 2026 का आयोजन चर्चा में है. इसके पीछे तीन बड़े कारण सामने आते हैं.

पहला, यह महाकुंभ 2025 के बाद पहला माघ मेला है.
दूसरा, इसे 7 सेक्टरों में फैलाकर लगभग 800 हेक्टेयर क्षेत्र में बसाया गया है.
तीसरा, गंगा पार आवागमन के लिए 9 पीपा पुल बनाए गए हैं, ताकि भीड़ के दौरान आवागमन बना रहे.

यहाँ आने वाले लोगों के लिए अनुभव सिर्फ स्नान तक सीमित नहीं रहता। मेले में आपको ये चीजें एक साथ मिलती हैं:

  • त्रिवेणी संगम और गंगा तट पर स्नान के कई घाट
  • किला क्षेत्र के मंदिर, अक्षयवट और पातालपुरी
  • लेटे हनुमान जी का दुर्लभ मंदिर
  • झूसी की ओर अखाड़े और साधु-संतों के शिविर
  • शहर के भीतर और आसपास के प्रसिद्ध मंदिर और पार्क

Magh Mela Prayagraj कैसे पहुँचे?

प्रयागराज आप ट्रैन, फ्लाइट से आसानी से पहुँच सकते है साथ ही आस-पास के शहरों और राज्यों से बस भी मिल जाती है.

Prayagraj ट्रैन से कैसे पहुँचे?

प्रयागराज आने का सबसे आसान और लोकप्रिय तरीका ट्रैन बताया गया है. शहर में कई स्टेशन हैं, जिनसे मेला क्षेत्र तक पहुँचना सरल रहता है.

मुख्य स्टेशन:

  • प्रयागराज जंक्शन
  • प्रयागराज छिवकी
  • प्रयाग जंक्शन
  • प्रयागराज रामबाग
  • प्रयागराज संगम

स्टेशन के बाहर से मेला क्षेत्र के लिए ऑटो और ई-रिक्शा मिल जाते हैं. शाही स्नान के दिनों में भीड़ बहुत बढ़ती है, तब 1 से 2 किमी तक पैदल चलना पड़ सकता है. बाकी दिनों में ऑटो या कार से संगम क्षेत्र के पास तक पहुँचना आसान रहता है.

Prayagraj फ्लाइट से कैसे आएँ?

प्रयागराज में अपना एयरपोर्ट है, इसके अलावा लखनऊ, वाराणसी और अयोध्या एयरपोर्ट से कनेक्टिविटी भी अच्छी बताई गई है. आप अपने रूट और सुविधा के हिसाब से किसी भी विकल्प से प्रयागराज पहुँच सकते हैं.

कार से आने वालों के लिए पार्किंग

अगर आप अपनी कार से आ रहे हैं, तो मेला क्षेत्र में 40 से ज्यादा पार्किंग स्थल बनाए गए हैं. भीड़ वाले दिनों में पार्किंग से आगे पैदल चलने की जरूरत पड़ सकती है, यह सामान्य बात है.

Magh Mela Prayagraj में होटल कहाँ ले?

बहुत से लोग सुबह प्रयागराज पहुँचते हैं, स्नान और दर्शन करके शाम तक लौट जाते हैं. यह सबसे आम पैटर्न है, फिर भी अगर रुकना हो, तो विकल्प साफ हैं.

होटल कहाँ लें?

होटल के लिए ये इलाके सुविधाजनक बताए गए हैं:

  • प्रयागराज जंक्शन के आसपास
  • रामबाग स्टेशन के आसपास
  • चुंगी के पास
  • सिविल लाइंस

यहाँ सामान्य होटलों की शुरुआत लगभग ₹2,000 से ₹2,500 से बताई गई है. बजट बढ़ाने पर ₹5,000, ₹10,000, ₹20,000 तक के कमरे भी मिलते हैं.

Magh Mela Prayagraj में धर्मशाला और बजट स्टे

  • परेड ग्राउंड के सामने बहराना इलाके में कुछ धर्मशालाएँ बताई गई हैं.
  • मेला क्षेत्र में जन आश्रय केंद्र बने हैं, जहाँ ₹100 से ₹200 में रुकने की व्यवस्था मिल सकती है.

जन आश्रय केंद्र में रुकने के लिए आधार कार्ड और मोबाइल नंबर साथ रखने की बात कही गई है. यह छोटा सा काम मौके पर समय बचा सकता है.

माघ मेला 2026 की तारीखें और शाही स्नान (44 दिन)

माघ मेला 2026 3 जनवरी (पौष पूर्णिमा) से शुरू होकर 15 फरवरी (महाशिवरात्रि) तक चलेगा. कुल अवधि 44 दिन बताई गई है.

शाही स्नान की प्रमुख तिथियाँ:

  • 3 जनवरी 2026: पौष पूर्णिमा
  • 14 जनवरी 2026: मकर संक्रांति
  • 18 जनवरी 2026: मौनी अमावस्या
  • 23 जनवरी 2026: बसंत पंचमी
  • 1 फरवरी 2026: माघी पूर्णिमा
  • 16 फरवरी 2026: महाशिवरात्रि (अंतिम शाही स्नान)

Magh Mela Prayagraj में स्नान के लिए प्रमुख जगहें

त्रिवेणी संगम में स्नान का धार्मिक महत्व बहुत बड़ा माना जाता है. मान्यता है कि संगम में डुबकी मोक्ष की ओर एक पवित्र कदम है. यही वजह है कि देश और दुनिया से श्रद्धालु यहाँ आते हैं.

किला घाट: यह पक्का घाट है, और यहाँ से नाव लेकर संगम की ओर जाया जा सकता है.
कच्चे घाट: पूरे गंगा किनारे कई कच्चे घाट भी मिलते हैं, जहाँ लोग स्नान करते हैं.
संगम नोच: यह एक लोकप्रिय स्नान क्षेत्र है. अगर आप सीधे संगम तक नहीं जाना चाहते, तो यहाँ स्नान करके भी आस्था की डुबकी लगाई जा सकती है. यहाँ अक्सर भीड़ ज्यादा होती है.

Magh Mela Prayagraj के आस पास घूमने को जगह

अगर आपके पास समय है, तो संगम क्षेत्र के बाहर भी प्रयागराज के कई दर्शनीय स्थल देखे जा सकते हैं. एक स्थान से दूसरे स्थान तक ₹20 से ₹30 में ऑटो से आना-जाना संभव बताया गया है, या आप ऑटो बुक भी कर सकते हैं.

श्री अलोपी माता मंदिर (अलोप शंकरी देवी)

यह मंदिर एक सिद्ध पीठ माना जाता है. मान्यताओं के अनुसार यहाँ माता सती के दाहिने हाथ का पंजा गिरकर लुप्त हो गया था. यहाँ मुख्य मंदिर में मूर्ति नहीं है, यहाँ पालना (झूला) की पूजा होती है. मंदिर की शैली भी आकर्षक बताई गई है.

नाग वासुकी मंदिर

यह मंदिर नागों के राजा भगवान वासुकी को समर्पित है. मान्यता के अनुसार समुद्र मंथन में वासुकी जी को रस्सी के रूप में प्रयोग किया गया था. कहा जाता है कि यहाँ दर्शन से कालसर्प दोष से मुक्ति मिलती है. इसे प्रयागराज के दिव्य मंदिरों में गिना जाता है.

अरैल क्षेत्र और शिवालय पार्क

नैनी ब्रिज पार करके आप अरैल क्षेत्र में पहुँच सकते हैं. पिछले साल महाकुंभ के समय यहाँ शिवालय पार्क बनाया गया था. यहाँ 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन के साथ अन्य मंदिर भी बताए गए हैं. बच्चों के लिए झूले और बोटिंग की सुविधा भी बताई गई है.

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