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Jagannath Puri Yatra:-कैसे जाएं, कहां ठहरें, दर्शन, घूमने की जगहें और बजट

By wiralwala

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Jagannath Puri Yatra:- समुद्र के किनारे बसा पुरी शहर, और उसके बीचोंबीच प्रभु श्री जगन्नाथ का दिव्य धाम, ऐसा अनुभव है जिसे शब्दों में बांधना आसान नहीं. अगर आप पहली बार जगन्नाथ पुरी यात्रा की प्लानिंग कर रहे हैं, तो सबसे बड़े सवाल वही होते हैं, कैसे पहुंचें, मंदिर के पास ठहरना सही रहेगा या नहीं, दर्शन में क्या नियम हैं, प्रसाद कहां मिलता है, और 2-3 दिन में कौन-कौन सी जगहें कवर हो सकती हैं. आज के इस आर्टिकल में आपको बताएंगे कैसे आप जगन्नाथ पुरी की यात्रा कर सकते हैं होटल कहां ले और मंदिर में दर्शन कैसे होता है.

Jagannath Puri Yatra क्यों जाएं? भारत के चार धामों में पूर्व दिशा का धाम

भारत में चार प्रमुख धाम चारों दिशाओं में माने जाते हैं. इनमें जगन्नाथ पुरी, पूर्व दिशा का धाम है, जो ओडिशा के पुरी शहर में समुद्र के पास स्थित है. यह मंदिर भगवान श्री कृष्ण को समर्पित माना जाता है, और पूरे साल यहां भक्तों का सैलाब बना रहता है.

यह एक ऐसा दिव्य धाम है, जहां दर्शन करके मन अपने आप हल्का हो जाता है.

चार धाम (दिशा के अनुसार):

  • उत्तर: बद्रीनाथ
  • पश्चिम: द्वारिका
  • दक्षिण: रामेश्वरम
  • पूर्व: जगन्नाथ पुरी

Jagannath Puri Yatra कैसे करें(ट्रेन और फ्लाइट से)?

पुरी पहुंचना आसान है, क्योंकि रेलवे और सड़क कनेक्टिविटी अच्छी है. ज्यादातर लोग ट्रेन से आते हैं, और फ्लाइट से आने वालों के लिए भुवनेश्वर सबसे नजदीकी विकल्प है.

Jagannath Puri ट्रेन से कैसे पहुंचें?

पुरी में well-connected रेलवे स्टेशन है. भारत के कई बड़े शहरों से यहां तक डायरेक्ट ट्रेनें मिल जाती हैं. स्टेशन से मंदिर की दूरी करीब 2 किलोमीटर है, इसलिए स्टेशन से उतरते ही आप जल्द ही मंदिर एरिया तक पहुंच जाते हैं.

Jagannath Puri फ्लाइट से कैसे पहुंचें?

पुरी का नजदीकी एयरपोर्ट बिजू पटनायक एयरपोर्ट, भुवनेश्वर है. यह पुरी से लगभग 55 किमी दूर है. भुवनेश्वर पहुंचकर आप पुरी के लिए आप बस या फिर टैक्सी ले सकते है.

Jagannath Puri के पास होटल कहाँ ले?

पुरी में होटल और धर्मशाला हर तरफ मिल जाएंगे, लेकिन आराम और समय बचाने के लिए मंदिर के पास ठहरना सबसे अच्छा रहता है. खासकर अगर आप सुबह जल्दी दर्शन करना चाहते हैं, या शाम को परिक्रमा मार्ग घूमने का प्लान है.

सुझाव: मंदिर से 500 मीटर के अंदर होटल या धर्मशाला लें.
सबसे बढ़िया लोकेशन: ग्रांड रोड मार्केट, यहां से मंदिर करीब 100 मीटर दूर रहता है.

  • होटल में अच्छे एसी रूम का बजट करीब ₹1200 से ₹1800 बताया गया है.
  • धर्मशालाएं भी मिलती हैं, जिनका शुरुआती बजट लगभग ₹500 से शुरू बताया गया है.
  • मंदिर ट्रस्ट का भक्त निवास भी एक विकल्प है, लेकिन इसके लिए पहले से जगन्नाथ मंदिर की ऑफिशियल वेबसाइट से बुकिंग करनी होती है.
  • भक्त निवास में डिलक्स रूम का बजट करीब ₹1200 से ₹1500 बताया गया है.

Jagannath Puri में दर्शन का सही तरीका (नियम, टाइमिंग, प्रसाद)

जगन्नाथ मंदिर बहुत विशाल है, और यहां दर्शन का अपना अनुशासन है. अगर आप पहले से नियम जान लेंगे, तो लाइन में खड़े होकर परेशानी नहीं होगी.

प्रवेश द्वार और जरूरी नियम

मंदिर में चार दिशाओं में चार प्रमुख द्वार हैं। प्रवेश से पहले ध्यान रखें:

  • मंदिर के अंदर बैग, मोबाइल, जूता चप्पल और इलेक्ट्रॉनिक सामान ले जाना मना है
  • प्रवेश द्वार के पास लॉकर सुविधा मिल जाती है
  • बताया गया है कि लॉकर में सामान फ्री में जमा किया जा सकता है

Jagannath Mandir Timing

बात करें जगन्नाथ मंदिर में दर्शन करने के समय का तो आप सुबह 5 बजे से रात 9 बजे तक दर्शन कर सकते है. दिन में 11:30 से 1:00 बजे तक भोग और विशेष पूजन के कारण दर्शन रुक जाते हैं. सामान्य दिनों में दर्शन करने में 1 से 2 घंटे का समय लग जाता है. वही ज्यादा भीड़ होने पर 3 से 4 घंटे भी लग सकते है.

Jagannath Mandir के आस पास घूमने की जगह

अगर आप पुरी में 3 दिन का प्लान बना रहे हैं, तो एक दिन आसपास की जगहें घूमने के लिए रखें. मंदिर मार्केट के पास टूर एंड ट्रेवल्स ऑफिस मिल जाते हैं, जहां एक दिन पहले बस बुक हो जाती है.

  • नॉन-एसी बस: ₹200 से ₹250
  • एसी बस: ₹300 से ₹350
  • टैक्सी (4 सीटर): ₹3000 से ₹3500
  • टैक्सी (7 सीटर): ₹4000 से ₹4500

जितना जल्दी सुबह निकलेंगे, उतना आराम से घूम पाएंगे, और शाम 7:00 से 8:00 बजे तक वापसी भी हो जाती है.

1) चंद्रभागा बीच (कोणार्क के पास)

पुरी से करीब 32 किमी दूरी पर, कोणार्क मंदिर के पास चंद्रभागा बीच है. यहां चंद्रभागा नदी बंगाल की खाड़ी में मिलती है. आधा घंटा यहां रुककर फोटो और समुद्र का नजारा देखना अच्छा लगता है.

2) कोणार्क सूर्य मंदिर (UNESCO साइट)

यहां एंट्री टिकट ₹40 बताया गया है. यह मंदिर 13वीं सदी में गंग वंश के राजा नरसिंह देव ने बनवाया था, और इसे कलिंग वास्तुकला का बेहतरीन उदाहरण माना जाता है. मंदिर भगवान सूर्य देव को समर्पित है, और इसे काला पगोड़ा भी कहा जाता है.

3) धौलीगिरी शांति स्तूप

कोणार्क से लगभग 55 किमी दूरी पर धौलीगिरी शांति स्तूप बताया गया है. यह स्तूप भगवान बुद्ध को समर्पित है, और यहां बुद्ध के जीवन से जुड़े दृश्य दिखाए गए हैं. यह जगह ऊंचाई पर है, इसलिए आसपास का नजारा भी अच्छा मिलता है. स्तूप के पीछे एक प्राचीन शिव मंदिर भी बताया गया है.

4) श्री लिंगराज मंदिर, भुवनेश्वर

जगन्नाथ पुरी मंदिर से लगभग 56 किमी दूरी पर श्री लिंगराज मंदिर है. यह प्राचीन मंदिर भगवान विष्णु और महादेव जी को समर्पित बताया गया है.

ध्यान रखें:

  • मोबाइल, कैमरा, बैग, जूता चप्पल अंदर ले जाना मना है
  • बाहर लॉकर सुविधा मिल जाती है
  • लाइन में लगकर प्रवेश होता है
  • यहां स्वयंभू शिवलिंग के दर्शन मिलते हैं

5) उदयगिरी और खंडागिरी गुफाएं

लिंगराज मंदिर से करीब 8 किमी दूरी पर उदयगिरी और खंडागिरी हैं, यहां प्राकृतिक और निर्मित गुफाएं हैं. एंट्री टिकट लगभग ₹20 प्रति व्यक्ति बताया गया है. यह जगह जैन साधु मुनियों से जुड़ी मानी जाती है, और निर्माण लगभग 250 ईस्वी के आसपास बताया गया है.

अगर आपको जगन्नाथ पूरी को लेके कोई विशेष पैकेज चाहिए या कोई और क्वेश्चन हो तो तो आप हमको wiralwala@gmail.com मेल कर सकते है.

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