Recession:-अपने हाल में सुना होगा कि दुनिया के दो बड़े देश जापान और यूके में Recession यानी की मंदी आ चुकी है. मंदी शब्द सुनते ही आपके दिमाग में अलग-अलग तरह के विचार आते होंगे कहीं इसका असर आपके व्यापार पर तो नहीं पड़ेगा या फिर कहीं आपकी नौकरी न चल जाए. लेकिन आपको पता है आखिर में मंदी कहते किसे हैं और यह फैसला कैसे लिया जाता है कि एक देश में मंदी आ चुकी है जापान और यूके के अलावा भारत में कब-कब मंदी ने दस्तक दी सब जानेंगे इस आर्टिकल में.

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मंदी Recession किसे कहते है
शुरुआत करते हैं मंदी शब्द से जब देश की अर्थव्यवस्था मैं गिरावट होने लगे तो कहा जाता है मंदी आ रही है या देश मंदी की तरफ बढ़ रहा है. आसान शब्दों में समझे तो जब देश के कारोबारियों का काम धीमा हो जाए देश की जीडीपी गिरने लगे और लगातार गिरती जाए ऐसे कंडीशन को कहते हैं मंदी को अंग्रेजी में रहते हैं Recession.

कैसे पता चलेगा मंदी आ गयी है?
अब समझते हैं कि आखिर किसी देश में Recession या मंदी आ गई है या क्या आने वाली है इसका पता कैसे चलता है तो दरअसल मंदी आंकने में का एक फार्मूला अमेरिकी इकोनॉमिस्ट जूलियस इसैक ने बताया था. फॉर्मूला के मुताबिक अगर किसी देश की जीडीपी लगातार दो तिमाही यानी की 6 महीने तक गिरती है तो माना जाता है उस देश में मंदी आ गई है या फिर देश मंदी की तरफ बढ़ रहा है.
जापान और यूके के केस में देखें तो उनकी जीडीपी ग्रोथ लगातार तीन क्वार्टर यानी करीब 9 महीने से गिरती जा रही है और फिलहाल जीडीपी ग्रोथ रेट नेगेटिव में जा पहुंचा है जिसकी वजह से यह दोनों देश जूलियस इसैक के फॉर्मूले मे फिट बैठते है.
अब तक आपको मंदी और उसको आंकने का फार्मूला समझ आ गया होगा अब देखते हैं कि आखिर भारत में कब-कब मंदी ने दस्तक दी है.

भारत में कब-कब मंदी ने दस्तक दी है?
तो 1947 मे देश को आजादी मिलने के बाद भारत ने अब तक चार बार आर्थिक मंदी देखी है.
1958:- भारत की जीडीपी नेगेटिव में चली गई.
दूसरी बार अर्थव्यवस्था को झटका लगा 1965 1966 में
1965-1966:- इस साल भारत मे सूखा पड़ा था और देश मे उत्पादन कम हुआ और देश की जीडीपी एक बार फिर से नेगेटिव में चली गई थी.
1979-80:- तीसरी बार साल 1979 से 1980 के बीच में इस समय दुनिया भर में तेल उत्पादन को एक बड़ा झटका लगा और भारत का तेल एक्सपोर्ट बिल करीब दो गुना हो गया इस बीच भारत की जीडीपी ग्रोथ रेट एक बार फिर से नेगेटिव में चली गई थी.
2008:- फिर आया साल 2008 जब पूरी दुनिया मंदी की चपेट में आ गई लेमन ब्रदर क्राइसिस को इस मंदी का कारण माना जाता है और इस समय भी भारत की जीडीपी ग्रोथ रेट नेगेटिव में जा पहुंची थी.

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