Orchha Dham
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Orchha Dham:-ओरछा धाम की एक दिन की यात्रा का अनुमानित खर्च ₹1,000 से ₹1,200 है, जिसमें ट्रेन का किराया अलग रहेगा। यहाँ पहुँचने के लिए लगभग 17 किलोमीटर दूर स्थित झाँसी रेलवे स्टेशन से बस, शेयरिंग ऑटो या निजी टैक्सी मिल जाती है।

श्री राम राजा सरकार की इस नगरी में मंदिरों के दर्शन के साथ बुंदेला राजाओं के महल और बेतवा नदी के सुंदर दृश्य भी देखने को मिलते हैं। आपकी यात्रा की शुरुआत पहुँचने और ठहरने की व्यवस्था से होती है, जिसके बाद राम राजा मंदिर से दर्शन और भ्रमण का क्रम आगे बढ़ता है।

Table of Contents

Orchha को छोटी अयोध्या क्यों कहते हैं?

मध्य प्रदेश के निवाड़ी जिले में बेतवा नदी के किनारे बसा ओरछा एक धार्मिक और ऐतिहासिक नगर है। यहाँ भगवान श्रीराम की पूजा राजा के रूप में होती है और पुलिस प्रशासन प्रतिदिन उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर देता है। इसी परंपरा के कारण ओरछा को छोटी अयोध्या भी कहा जाता है।

बुंदेला राजपूत शासक राजा रुद्र प्रताप सिंह ने 1501 ईस्वी में इस नगर की स्थापना की थी। यहाँ राम राजा मंदिर के दर्शन के लिए लाखों श्रद्धालु आते हैं। साथ ही, विदेशी पर्यटक भी यहाँ की पुरानी संस्कृति, कला और ऐतिहासिक इमारतें देखने पहुँचते हैं।

राम राजा मंदिर, चतुर्भुज मंदिर, राजमहल, जहाँगीर महल और छतरियाँ यहाँ के प्रमुख दर्शनीय स्थल हैं। मध्य प्रदेश पर्यटन का ओरछा परिचय भी इन स्थानों की जानकारी देता है।

Orchha कैसे पहुँचें?

ट्रेन से आने का रास्ता

ओरछा में रेलवे स्टेशन है, लेकिन यहाँ कम ट्रेनें रुकती हैं। इसलिए करीब 17 किलोमीटर दूर झाँसी रेलवे स्टेशन से आना सुविधाजनक है। झाँसी के लिए अच्छी रेल कनेक्टिविटी उपलब्ध है।

स्टेशन से ओरछा तक बस, शेयरिंग ऑटो या निजी टैक्सी से पहुँच सकते हैं।

हवाई यात्रा और अपनी गाड़ी से आगमन

ओरछा का नज़दीकी हवाई अड्डा ग्वालियर में है, जिसकी दूरी लगभग 115 किलोमीटर है। हवाई यात्रा से आने पर आगे का रास्ता सड़क मार्ग से पूरा होता है।

अपनी कार से आने वाले यात्रियों के लिए मंदिर और किले के पास पार्किंग की व्यवस्था भी है।

कहाँ ठहरें और किस मौसम में आएँ?

राम राजा मंदिर के पास होटल और गेस्टहाउस

राम राजा मंदिर से लगभग 100 से 200 मीटर के दायरे में कई होटल और गेस्टहाउस हैं। यहाँ कमरों की कीमत करीब ₹800 से शुरू होती है। ₹1,200 से ₹1,500 के बजट में अच्छे एसी कमरे मिल जाते हैं।

इसके अलावा ओरछा में महँगे रिसॉर्ट भी हैं। इनमें ₹3,000, ₹5,000 और ₹10,000 तक के बजट वाले विकल्प उपलब्ध हैं। इस तरह मंदिर के पास सामान्य कमरे और अधिक सुविधाओं वाले रिसॉर्ट, दोनों तरह की ठहरने की व्यवस्था मिलती है।

घूमने का अच्छा समय

ओरछा की यात्रा पूरे साल की जा सकती है। हालाँकि, अक्टूबर से अप्रैल का समय घूमने के लिए अच्छा माना जाता है।

Orchha tourist places

श्री राम राजा मंदिर: दर्शन, कथा और समय

यात्रा की शुरुआत श्री राम राजा मंदिर से होती है। विशाल प्रांगण में बना यह मंदिर ओरछा का प्रमुख आस्था केंद्र है। राम राजा मंदिर की परंपरा में श्रीराम को नगर के राजा का स्थान प्राप्त है।

ओरछा के राम राजा मंदिर के प्रांगण का दृश्य, जिसमें मंदिर की वास्तुकला और दो सुरक्षाकर्मी दिख रहे हैं।

रानी गणेश कुंवरी और बालरूप में श्रीराम की कथा

मान्यता है कि ओरछा की रानी गणेश कुंवरी भगवान श्रीराम की बड़ी भक्त थीं। उन्होंने अयोध्या में सरयू नदी के तट पर 21 दिनों तक कठोर तपस्या की। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर श्रीराम बालरूप में उनकी गोद में प्रकट हुए।

रानी ने उनसे ओरछा चलने का आग्रह किया। श्रीराम ने तीन शर्तें रखीं:

  1. वे बालरूप में केवल पुष्य नक्षत्र के दौरान यात्रा करेंगे।
  2. उन्हें पहली बार जहाँ बैठाया जाएगा, वे हमेशा वहीं विराजमान रहेंगे।
  3. ओरछा में उनकी पूजा राजा के रूप में होगी।

इसके बाद रानी ने राजा मधुकर शाह को भव्य मंदिर बनवाने का संदेश भेजा। केवल पुष्य नक्षत्र में यात्रा करने के कारण उन्हें ओरछा पहुँचने में नौ महीने लगे।

उस समय मंदिर तैयार नहीं हुआ था। कथा के अनुसार, रानी ने भूलवश श्रीराम को रसोईघर में बैठा दिया। पहली बार वहीं विराजने के कारण वे उसी स्थान पर स्थापित रह गए।

गर्मियों और सर्दियों में दर्शन का समय

मंदिर के दर्शन का समय मौसम के अनुसार अलग है।

मौसमसुबह के दर्शनशाम और रात के दर्शन
गर्मीसुबह 8:00 से दोपहर 12:30 बजेरात 8:00 से 10:30 बजे
सर्दीसुबह 9:00 से दोपहर 1:00 बजेशाम 7:00 से रात 9:30 बजे

इस तरह गर्मियों के मुकाबले सर्दियों में शाम के दर्शन एक घंटा पहले शुरू होते हैं।

चतुर्भुज मंदिर की भव्य बनावट

राम राजा मंदिर के पास ही चतुर्भुज मंदिर है। यह वही मंदिर है, जिसका निर्माण भगवान श्रीराम के लिए हो रहा था, लेकिन रानी के ओरछा पहुँचने तक काम पूरा नहीं हुआ था।

ऊँचे चबूतरे पर बने इस मंदिर की ऊँचाई लगभग 344 फीट है। इसकी बनावट में मंदिर, किले और महल, तीनों की झलक दिखाई देती है।

राजा मधुकर शाह ने 16वीं शताब्दी में इसकी नींव रखवाई थी। बाद में राजा वीर सिंह देव ने निर्माण पूरा कराया। मंदिर में भगवान विष्णु और राधा-कृष्ण के दिव्य स्वरूपों के दर्शन होते हैं।

Orchha किला और उसके ऐतिहासिक महल

राम राजा मंदिर के सामने लगभग 100 मीटर की दूरी पर ऐतिहासिक ओरछा किला है। ओरछा के पर्यटन स्थलों के लिए ₹50 का संयुक्त टिकट मिलता है, जो इन स्थलों के भ्रमण के लिए मान्य है।

राजा रुद्र प्रताप सिंह ने 1501 ईस्वी में किले का निर्माण कराया था। इससे पहले बुंदेला शासक गढ़कुंडार में रहते थे। बाद में सुरक्षा के कारण उन्होंने ओरछा को चुना।

ओरछा किले का ऐतिहासिक प्रांगण और वास्तुकला।

राजा महल की नक्काशी और ऊपर से दिखते मंदिर

किले के भीतर राजा महल है, जिसका निर्माण राजा मधुकर शाह ने 1554 में शुरू कराया था। यह राजा का निजी निवास था।

महल की दीवारों पर बनी नक्काशी देखने लायक है। यहाँ दीवान-ए-खास और दीवान-ए-आम भी हैं, जहाँ राजसी दरबार की झलक मिलती है।

राजा महल के ऊपरी हिस्से में भी जा सकते हैं। वहाँ से राम राजा मंदिर और चतुर्भुज मंदिर के सुंदर दृश्य दिखाई देते हैं।

जहाँगीर महल और दो शासकों की मित्रता

तीन मंज़िला जहाँगीर महल का निर्माण राजा वीर सिंह देव ने 17वीं शताब्दी में मुगल बादशाह जहाँगीर के लिए कराया था।

कहा जाता है कि दोनों में गहरी मित्रता थी और वीर सिंह देव ने कई युद्धों में जहाँगीर का साथ दिया था। मान्यता है कि जहाँगीर पहली बार ओरछा आने पर इसी महल में ठहरे थे। इसलिए यह महल उन्हें समर्पित है।

शस्त्रागार, बाग और शीश महल

किले में राजा महल और जहाँगीर महल के अलावा शस्त्रागार तथा बाग भी हैं। यहाँ का शीश महल अब हेरिटेज होटल में बदल चुका है।

Orchha बेतवा तट पर बुंदेला राजाओं की छतरियाँ

किले से लगभग एक किलोमीटर दूर बेतवा नदी के किनारे राजकीय छतरियाँ हैं। कंचना घाट पर बनी ये छतरियाँ बुंदेला राजाओं के दाह-संस्कार स्थलों के स्मारक हैं।

इनका निर्माण 16वीं से 18वीं शताब्दी के बीच हुआ था। यहाँ कुल 15 छतरियाँ हैं। देखने में इनका स्वरूप मिलता-जुलता है, लेकिन हर छतरी की बनावट दूसरी से अलग है।

ओरछा में बेतवा नदी के किनारे स्थित प्राचीन बुंदेला छतरियां और नदी के पत्थर।

नदी के किनारे खड़ी ये छतरियाँ ओरछा के प्रमुख ऐतिहासिक दर्शनीय स्थलों में शामिल हैं।

Orchha कंचना घाट पर नौकायन और नदी किनारे सुकून

छतरियों के बाद कंचना घाट पर बेतवा नदी का दृश्य देखने को मिलता है। मंदिरों और महलों के भ्रमण के बीच यहाँ बैठकर कुछ शांत पल बिताए जा सकते हैं। बेतवा नदी और कंचना घाट ओरछा के प्रमुख घूमने वाले स्थानों में गिने जाते हैं।

बेतवा नदी में नौकायन और राफ्टिंग भी होती है। नौकायन का बताया गया किराया ₹100 प्रति व्यक्ति है।

पुल के पास का दृश्य और फोटोग्राफी

कंचना घाट से करीब 100 मीटर आगे बेतवा नदी के पुल के पास एक और सुंदर स्थान है। यह जगह नदी के दृश्यों और फोटोग्राफी के लिए प्रसिद्ध है।

यहाँ नदी किनारे पत्थरों पर बैठकर समय बिताया जा सकता है। घाट और पुल के आसपास का यह हिस्सा यात्रा में कुछ देर ठहरने का अवसर देता है।

लक्ष्मी मंदिर की बुंदेला वास्तुकला

नदी के पुल वाले क्षेत्र से लगभग डेढ़ किलोमीटर दूर लक्ष्मी मंदिर है। यह मंदिर बुंदेला वास्तुकला और अपने देवी-देवताओं के प्रति बुंदेला शासकों की श्रद्धा का उदाहरण है।

राजा वीर सिंह देव ने 1622 ईस्वी में इसका निर्माण कराया था। मंदिर की संरचना श्री यंत्र पर आधारित है।

यहाँ देवी लक्ष्मी के दर्शन होते हैं। राम राजा मंदिर, चतुर्भुज मंदिर और किले के बाद इस मंदिर का भ्रमण यात्रा का अगला पड़ाव है।

Orchha शाम को राम राजा मंदिर की आरती

दिनभर के भ्रमण के बाद शाम को फिर श्री राम राजा मंदिर पहुँचने का क्रम है। रोशनी में मंदिर की भव्यता और बढ़ जाती है। शाम की आरती के समय प्रांगण का दृश्य भी खास होता है। मंदिर के आसपास रामलोक का निर्माण भी चल रहा है। इसके बनने से मंदिर के आसपास के क्षेत्र का स्वरूप और सुंदर होगा।

Orchha में भोजन कहाँ मिलता है?

किले के पास चौपाटी है, जहाँ कई रेस्टोरेंट और कैफे मिलते हैं। भ्रमण के दौरान यहाँ खाने-पीने के विकल्प उपलब्ध हैं। इसके अलावा ओरछा में सामान्य और ऊँचे बजट वाले रेस्टोरेंट भी हैं। यहाँ शुद्ध और सात्त्विक भोजन मिल जाता है।

Orchha यात्रा का अनुमानित बजट

एक दिन में लौटने और एक रात रुकने वाली यात्रा का अनुमानित खर्च अलग है।

यात्रा की अवधिअनुमानित बजटट्रेन का किराया
उसी दिन आना और लौटना₹1,000 से ₹1,200अलग
दो दिन और एक रात, दो से तीन लोगों के साथ₹3,000 से ₹3,500 प्रति व्यक्तिअलग

दोनों बजट में ट्रेन का टिकट शामिल नहीं है। कुल खर्च में आने-जाने का रेल किराया अलग जुड़ेगा।

ठहरने के लिए ₹800 से शुरू होने वाले कमरे और अधिक बजट वाले रिसॉर्ट, दोनों विकल्प मौजूद हैं। इसलिए रुकने की जगह के अनुसार यात्रा का खर्च भी बदलता है।

आस्था और इतिहास के साथ ओरछा की यात्रा

ओरछा की यात्रा का केंद्र श्री राम राजा सरकार के दर्शन हैं। पास ही चतुर्भुज मंदिर और किला हैं, जबकि बेतवा तट की छतरियाँ नगर के इतिहास का दूसरा पक्ष दिखाती हैं।

झाँसी से सड़क मार्ग की सुविधा और मंदिर के आसपास ठहरने के विकल्प इस यात्रा को आसान बनाते हैं। दिनभर मंदिरों, महलों और नदी किनारे घूमने के बाद शाम की आरती के साथ ओरछा का अनुभव पूरा होता है।

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