Sanwariya Seth Mandir Yatra Guide:- राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले में मंडफिया नाम का एक छोटा-सा गांव है, और यहीं बसा है Sanwariya Seth Mandir — वो जगह जहां हर दिन हजारों श्रद्धालु सुबह-सुबह पहुंचते हैं और दर्शन करते है। अगर आप भी Sanwariya Seth Mandir जाने का मन बना रहे हैं, तो ये आर्टिकल आपके लिए है। इस आर्टिकल में आपको पता चलेगा स्टेशन से मंदिर की दूरी, ठहरने की जगह और दर्शन का सही तरीका जो की आपकी यात्रा को काफी आसान बना देगा।

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Sanwariya Seth Mandir से जुड़ी मान्यता क्या है?
यहां के लोग मानते हैं कि सांवरिया सेठ, मीराबाई के गिरधर गोपाल का ही एक रूप हैं — वही गिरधर गोपाल जिनकी मीराबाई सेवा और पूजा किया करती थीं। यही वजह है कि कई व्यापारी और श्रद्धालु उन्हें अपने कारोबार में साझेदार मानते हैं, और अपनी कमाई का एक हिस्सा मंदिर में चढ़ाते हैं। कहा तो यहां तक जाता है कि Sanwariya Seth Mandir में हर महीने 10 करोड़ रुपये से ज्यादा का दान आता है।
सांवरिया सेठ मूर्तियां कैसे मिलीं, इसकी कहानी
लोककथा के अनुसार, मुगल काल में जब मंदिरों पर हमले हो रहे थे, तब संत दयाराम जी ने कई मूर्तियों को एक बड़ के पेड़ के नीचे जमीन में दबा दिया था ताकि उन्हें नुकसान न पहुंचे। बरसों बाद, 1840 में मंडफिया के भोलाराम गुर्जर को सपना आया कि बांगुड़ गांव के पास बड़ के पेड़ के नीचे तीन मूर्तियां दबी हुई हैं। खुदाई करवाई गई, और सचमुच मूर्तियां मिलीं। उन्हीं मूर्तियों के आस-पास आज तीन मंदिर खड़े हैं — भादसोड़ा का पुराना मंदिर, जिस जगह मूर्तियां मिलीं वहां बना प्राकट्य स्थल, और मंडफिया का मुख्य Sanwariya Seth Mandir।

Sanwariya Seth Mandir कैसे पहुंचें
सांवरिया सेठ मंदिर ट्रेन और बस से कैसे पहुंचें
चित्तौड़गढ़ रेलवे स्टेशन मंदिर से करीब 44 किलोमीटर दूर पड़ता है। स्टेशन से बाहर निकलते ही बस, ऑटो और टैक्सी मिल जाती हैं। बस का किराया ₹60-80 के बीच रहता है, वहीं टैक्सी वाले आने-जाने के ₹500 से लेकर ₹3,000 तक मांग लेते हैं — तो मोलभाव करना न भूलें।
रास्ते का ज्यादातर हिस्सा, यानी करीब 35 किलोमीटर, हाईवे पर ही है। इसके बाद गांव के अंदर की तरफ करीब 7 किलोमीटर जाना पड़ता है।
सांवरिया सेठ मंदिर का नज़दीकी एयरपोर्ट
सांवरिया सेठ मंदिर का नज़दीकी एयरपोर्ट उदयपुर का महाराणा प्रताप एयरपोर्ट है जो की मंदिर से लगभग 65 किलोमीटर दूर है। वहां से बस या टैक्सी लेकर आसानी से पहुंचा जा सकता है। और अगर खुद की गाड़ी से जा रहे हैं तो चिंता मत कीजिए — मंदिर के पास काफी बड़ी और मुफ्त पार्किंग की सुविधा है।
Sanwariya Seth Mandir के पास होटल कहाँ ले?
बस जहां रुकती है, वहां से महज 200-300 मीटर के दायरे में आपको ढेरों होटल, गेस्ट हाउस और धर्मशालाएं मिल जाएंगी। यहां से मंदिर तक पैदल ही जाया जा सकता है।
मंदिर के रास्ते पर पड़ने वाले यशोदा भवन में कमरे ₹100 से शुरू हो जाते हैं। आम धर्मशाला का किराया लगभग ₹500 और होटल का शुरुआती रेट करीब ₹600 है। हां, वीकेंड और त्योहारों पर ये दरें दो-तीन गुना तक बढ़ सकती हैं, इसलिए हो सके तो सामान्य दिनों में जाने की कोशिश करें।
जो लोग उसी दिन लौटना चाहते हैं और सिर्फ नहा-धोकर तैयार होना चाहते हैं, वो ₹100-150 प्रति व्यक्ति देकर एक-डेढ़ घंटे के लिए कमरा ले सकते हैं।

Sanwariya Seth Mandir में दर्शन के नियम
मंदिर के पास एक बड़ा बाजार है और अभी एक भव्य कॉरिडोर भी बनाया जा रहा है, जिससे होकर आप मुख्य प्रवेश द्वार तक पहुंचते हैं। मंदिर खुद काफी विशाल है, चारों तरफ गलियारे बने हुए हैं, और रात में लाइटिंग में इसकी सजावट देखने लायक होती है।
कुछ बातें ध्यान रखने वाली हैं:
- मोबाइल फोन ले जा सकते हैं, लेकिन मुख्य गर्भगृह में फोटो-वीडियो लेना मना है
- अंदर प्रसाद नहीं चढ़ता, फूल-माला ले जा सकते हैं
- दर्शन के बाद गलियारों से होकर दूसरी तरफ से बाहर निकलना होता है
- बाहर प्रसाद काउंटर से लड्डू और मठरी घर ले जाने के लिए खरीद सकते हैं
Sanwariya Seth Mandir timings
मंदिर का समय सुबह 5:30 बजे से रात के 11 बजे तक का रहता है. दोपहर में 12 बजे से 2:30 बजे तक बंद रहता है।

Sanwariya Seth Mandir के आस पास घूमने की जगह
प्राकट्य स्थल — मुख्य मंदिर से करीब 7 किलोमीटर दूर, हाईवे के पास। ऑटो-बस का किराया करीब ₹20। यहीं मूर्तियां मिली थीं, इसलिए ज्यादातर श्रद्धालु मुख्य मंदिर के बाद यहां जरूर जाते हैं।
आली गांव का शनि महाराज मंदिर — प्राकट्य स्थल से थोड़ा और आगे, करीब 10 किलोमीटर की दूरी पर। स्थानीय लोगों की यहां खास आस्था है, लोग तेल और तिल चढ़ाने आते हैं।
चित्तौड़गढ़ किला — अगर समय हो तो इसे मिस मत कीजिए। स्टेशन के सामने से शेयर ऑटो मिलते हैं, ₹100-150 प्रति व्यक्ति में, और तीन-चार घंटे में पूरा किला घुमाकर वापस छोड़ देते हैं। जौहर स्थल, मीराबाई मंदिर, पद्मिनी महल, काली माता मंदिर — सब यहीं है।
कब जाएं और कितने दिन का प्लान बनाएं
अक्टूबर से अप्रैल का मौसम सबसे अच्छा रहता है। वीकेंड, त्योहारों और हर एकादशी पर भीड़ काफी बढ़ जाती है, तो अगर भीड़ से बचना चाहते हैं तो weekday चुनें।
सिर्फ मंदिर दर्शन करना है तो एक दिन का ट्रिप काफी है। लेकिन अगर चित्तौड़गढ़ किला भी घूमना है, तो 2 दिन और 1 रात का प्लान बेहतर रहेगा।
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